POCSO कानून का खौफ: बच्चों पर अपराधियों के लिए ‘जीरो टॉलरेंस’

गुजरात में नाबालिगों से दरिंदगी करने वालों पर कानून का सख़्त प्रहार

लक्ष्यवेध | कृष्णा घनश्याम झा

बच्चों की सुरक्षा को लेकर गुजरात में अब किसी भी तरह की ढिलाई नहीं बरती जा रही है। POCSO कानून के तहत नाबालिगों के साथ यौन अपराध करने वालों के खिलाफ राज्य सरकार और पुलिस ने ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाते हुए कड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है।

18 वर्ष से कम आयु के बच्चों के साथ छेड़छाड़, यौन उत्पीड़न, दुष्कर्म, ऑनलाइन शोषण और अश्लील सामग्री जैसे अपराधों में तेज़ जांच, समयबद्ध चार्जशीट और फास्ट-ट्रैक कोर्ट में सुनवाई अनिवार्य की गई है। अब न तो समझौते की गुंजाइश है और न ही किसी रसूख या दबाव की।

कानून स्पष्ट है— अपराध सिद्ध होने पर आजीवन कारावास से लेकर फांसी तक की सज़ा का प्रावधान है। साथ ही, पीड़ित बच्चे की पहचान उजागर करना भी दंडनीय अपराध है। हालिया कार्रवाइयों से साफ हो गया है कि कानून अब केवल कागज़ों में नहीं, बल्कि ज़मीन पर सख़्ती से लागू हो रहा है।

लक्ष्यवेध का स्पष्ट संदेश—
बच्चों पर हाथ उठाने वाले नराधमों के लिए समाज में कोई जगह नहीं। POCSO कानून का सख़्त और निरंतर अमल ही बच्चों को सुरक्षित भविष्य दे सकता है।

स्पष्ट चेतावनी:
“बच्चों पर अपराध किया तो कानून छोड़ेगा नहीं।”

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