
दमन के कचीगाम स्थित नायसा सुपरप्लास्ट कंपनी में हड़ताल कवरेज करने पहुंचे “लक्ष्यवेध न्यूज़ पेपर” के रिपोर्टर निखिल पंकज झा के साथ मारपीट और बदसलूकी का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। घटना के बाद कंपनी प्रबंधन से जुड़े सुमित मुतरेजा समेत अन्य लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है, लेकिन FIR होने के बावजूद अब तक मुख्य आरोपी पुलिस की गिरफ्त से बाहर है। इससे पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
फरियाद के अनुसार, 24 मई की रात हड़ताल खत्म होने के बाद पत्रकार निखिल झा कंपनी के बाहर वीडियो रिकॉर्डिंग कर रहे थे। इसी दौरान कुछ कर्मचारियों ने उनके साथ अभद्र व्यवहार किया और बाद में उन्हें कंपनी ऑफिस के अंदर ले जाकर मारपीट की गई। आरोप है कि उनका मोबाइल फोन छीन लिया गया तथा वीडियो और फोटो डिलीट कर दिए गए।
घटना के दौरान निखिल झा ने “लक्ष्यवेध” के एडिटर को फोन कर पूरी जानकारी दी। सूचना मिलते ही एडिटर अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे और रात करीब 10 बजे पत्रकार को कंपनी परिसर से बाहर निकाला गया। उसी रात कचीगाम पुलिस स्टेशन में लिखित शिकायत दी गई थी।
सूत्रों के मुताबिक, अगले दिन मामले की जानकारी दमन के SP केतन बंसल को दी गई। SP के निर्देश के बाद कचीगाम पुलिस ने BNS की धारा 127(2), 115(2), 351(2) और 3(5) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की।
पत्रकार निखिल झा का आरोप है कि पूरी घटना कंपनी प्रबंधन के इशारे पर हुई। शिकायत में यह भी उल्लेख है कि मारपीट के बाद सुमित मुतरेजा ने “कैसी सर्विस हुई?” जैसी टिप्पणी की थी, जिससे मामले ने और गंभीर रूप ले लिया है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि FIR दर्ज होने के बावजूद आरोपी अब तक पुलिस की पकड़ से बाहर क्यों है? क्या उसे अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail) लेने के लिए समय दिया जा रहा है? और क्या प्रभावशाली एवं पैसे वाले लोगों के लिए कानून की प्रक्रिया अलग तरीके से काम करती है?
इस मामले ने सिर्फ पत्रकार सुरक्षा ही नहीं, बल्कि पुलिस की निष्पक्षता और कानून व्यवस्था को लेकर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सभी की नजर पुलिस जांच और आगे होने वाली कार्रवाई पर टिकी हुई है।

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