शराबी की लापरवाही, निर्दोष घायल — दरभंगा पुलिस की निष्पक्ष जांच जारी

महिला की पैर की हड्डी टूट गयी

(संवाददाता | दरभंगा)

दरभंगा जिले में शराब के नशे में वाहन चलाने का एक गंभीर मामला सामने आया है, जहाँ एक शराबी बाइक सवार की लापरवाही ने पैदल जा रहे दो लोगों की ज़िंदगी अस्त-व्यस्त कर दी।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, राजू पासवान, निवासी राढ़ी गांव, जिला दरभंगा, नशे की हालत में तेज रफ्तार से बाइक चला रहा था। इसी दौरान उसने जोगियारा स्टेशन ट्रेन पकड़ने के लिए पैदल जा रहे
नागेश रूबकांत झा
और उनकी भाभी
प्रभा उमेश देवी,
निवासी बसंत गांव, जिला दरभंगा, को ज़ोरदार टक्कर मार दी।

हादसा इतना भयावह था कि नागेश रूबकांत झा और प्रभा देवी—दोनों के पैरों की हड्डियाँ टूट गईं, वहीं प्रभा देवी के सिर में भी गंभीर चोट आई। दुर्घटना में बाइक सवार राजू पासवान को भी चोटें आईं।

मौके पर मौजूद स्थानीय लोगों ने मानवता दिखाते हुए तीनों घायलों को तत्काल नज़दीकी अस्पताल पहुँचाया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, अस्पताल ले जाते समय राजू पासवान ने कहा था—

आप लोग इलाज कराइए, हम पूरा खर्च देंगे और किसी तरह की पुलिस कार्रवाई मत कीजिए।

स्थानीय लोगों का कहना है कि उस वक्त माहौल पूरी तरह इलाज और जान बचाने पर केंद्रित था और किसी प्रकार की मारपीट नहीं हुई।

हालांकि, हादसे की गंभीरता को देखते हुए पीड़ित पक्ष ने पुलिस को एक लिखित आवेदन दिया। इलाज के दौरान 16 दिन बाद राजू पासवान की अस्पताल में मौत हो गई। इसके बाद मृतक के परिजनों ने आरोप लगाया कि नागेश झा और प्रभा देवी ने राजू पासवान की पिटाई की, जिससे उसकी मौत हुई।

इन आरोपों को प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय लोगों ने पूरी तरह खारिज किया है। गवाहों का कहना है कि यदि मारपीट हुई होती, तो अस्पताल ले जाते समय राजू पासवान द्वारा इलाज का खर्च उठाने और पुलिस कार्रवाई न करने की बात कहना तर्कसंगत नहीं लगता।

इस मामले की एक मानवीय सच्चाई यह भी है कि प्रभा देवी पहले से विधवा हैं। घटना की जानकारी मिलते ही उनका बेटा, जो कोलकाता में रहता है, दरभंगा पहुँचा और माँ की गंभीर हालत को देखते हुए उन्हें बेहतर इलाज के लिए कोलकाता लेकर गया।

पुलिस सूत्रों के अनुसार, पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और तथ्यपरक जांच जारी है। दरभंगा पुलिस के आला अधिकारी कर्तव्यनिष्ठ माने जाते हैं और उनके नेतृत्व में यह भरोसा दिलाया गया है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट, मेडिकल दस्तावेज और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों के आधार पर ही कार्रवाई होगी, ताकि किसी निर्दोष के साथ अन्याय न हो।

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