वापी में आग का कहर: वाइब्रेंट बिजनेस पार्क में भीषण हादसा, दो युवक गंभीर रूप से झुलसे

लालच और लापरवाही की भट्टी में कब तक सुलगते रहेंगे लोग ?

वापी।शुभम राई
नेशनल हाईवे–48 के किनारे स्थित वाइब्रेंट बिजनेस पार्क में उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब अनसूया सर्जिकल कंपनी में अचानक भीषण आग लग गई। आग इतनी तेजी से फैली कि पास की एक अन्य कंपनी भी इसकी चपेट में आ गई, जिससे पूरे औद्योगिक क्षेत्र में हड़कंप मच गया।
आग की गंभीरता को देखते हुए वलसाड ज़िले के अलग-अलग क्षेत्रों से दमकल विभाग की 15 से अधिक गाड़ियाँ मौके पर पहुंचीं।
फायर ब्रिगेड विभाग की टीमों ने कई घंटों की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाने की कोशिश की।
सुरक्षा के मद्देनज़र आसपास की कंपनियों का सामान तुरंत सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट कराया गया, ताकि आग और अधिक न फैले।
इस भीषण हादसे में दो युवक गंभीर रूप से झुलस गए—
आशिष कुमार (उम्र 20 वर्ष) — लगभग 60 प्रतिशत झुलसे
सनी कमल (उम्र 21 वर्ष) — लगभग 76 प्रतिशत झुलसे
दोनों घायलों को तत्काल हरिया अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनकी हालत गंभीर बताई जा रही है।
फिलहाल आग लगने के कारणों की जांच जारी है। पुलिस और दमकल विभाग के अधिकारी मौके पर मौजूद हैं और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।

लेकिन इससे भी बड़ा सवाल…
वापी में आग लगने की यह कोई पहली घटना नहीं है।
अक्सर देखा जा रहा है कि रिहायशी और कमर्शियल इमारतों में बिना फायर NOC के
लिक्विड केमिकल, केमिकल सॉल्वेंट, गैस सिलेंडर, विस्फोटक सामग्री, पटाखे, ऑक्सीजन सिलेंडर और पेट्रोल-डीज़ल का भंडारण किया जा रहा है।
आग लगने की स्थिति में
लोगों को भागने तक का मौका नहीं मिलता,
और इसकी सबसे बड़ी कीमत आम नागरिक चुकाते हैं।
सवाल यह भी है कि—
क्या वापी महानगरपालिका
और फायर विभाग की ज़िम्मेदारी नहीं बनती कि
NOC जारी करने से पहले जमीनी स्तर पर सख़्त जांच की जाए?
सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि
मकान मालिक और कमर्शियल बिल्डिंग मालिक,
जो लालच में आकर अपनी इमारतों को खतरनाक गोदाम बना देते हैं,
उन पर शायद ही कभी कठोर कार्रवाई होती है।
यही वजह है कि उनका हौसला बढ़ता जा रहा है।
स्थानीय लोगों की मांग है कि
ऐसे मामलों में सिर्फ़ लापरवाही नहीं,
बल्कि कठोर आपराधिक धाराओं के तहत कार्रवाई हो,
ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं पर अंकुश लगाया जा सके।
आज पूरा वापी एक ही सवाल पूछ रहा है—
“लालच की भट्टी में कब तक सुलगते रहेंगे लोग?
कब तक इंसानी जानों की बलि चढ़ती रहेगी ?”

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