
दमन में देह व्यापार की चर्चा एक-दो बार नहीं, बल्कि हमेशा ही ‘भीम’ नाम के इर्द-गिर्द घूमती रही है। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, वर्षों से चल रहे इस कथित अवैध धंधे में भीम को एक प्रमुख चेहरा माना जाता है। हैरानी की बात यह है कि लगातार और बार-बार अख़बारों में नाम प्रकाशित होने के बावजूद भी उसके कथित नेटवर्क पर अब तक प्रभावी रोक नहीं लग पाई है, जिससे संरक्षण की चर्चाएं भी थमने का नाम नहीं ले रहीं।
सूत्रों का दावा है कि यह कथित गतिविधि लंबे समय से देवका क्षेत्र स्थित होटल रत्नाकर के आसपास से संचालित हो रही है। होटल के पीछे स्थित वाड़ी में कथित तौर पर लड़कियों की उपलब्धता कराई जाती है। आरोप है कि भीम द्वारा एक मोबाइल नंबर जारी किया गया है, जिस पर ‘हैलो’ का संदेश भेजते ही व्हाट्सऐप के माध्यम से कई लड़कियों की तस्वीरें और कथित रेट की जानकारी भेज दी जाती है।
बताया जा रहा है कि यह नेटवर्क किसी एक होटल तक सीमित नहीं है, बल्कि अलग-अलग होटलों में लड़कियों की सप्लाई की जाती है। सूत्रों के अनुसार, हर लड़की के पीछे एक केयर टेकर नियुक्त रहता है, जो उसकी आवाजाही, होटल तक पहुंच, ठहरने और कथित ग्राहकों से संपर्क की पूरी व्यवस्था संभालता है। इससे यह साफ़ संकेत मिलता है कि पूरा तंत्र संगठित और सुनियोजित ढंग से चलाया जा रहा है।
एक और गंभीर पहलू यह सामने आ रहा है कि सूत्रों के अनुसार, इस कथित नेटवर्क में शामिल अधिकांश लड़कियों के बांग्लादेशी होने की आशंका जताई जा रही है। बताया जाता है कि इनके पास आधार कार्ड जैसे पहचान पत्र भी होते हैं, जिनमें भारत–बांग्लादेश सीमा से सटे इलाकों का पता दर्ज मिलता है। विशेष रूप से बोनगांव जैसे बॉर्डर क्षेत्र का उल्लेख सामने आने से दस्तावेज़ों की वैधता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि यदि ये आरोप सही हैं, तो मामला केवल अवैध देह व्यापार तक सीमित नहीं रह जाता, बल्कि मानव तस्करी, फर्जी दस्तावेज़ों के इस्तेमाल और सुरक्षा व्यवस्था में चूक जैसे गंभीर मुद्दों से भी जुड़ जाता है। अब सवाल यह है कि जो नाम हमेशा से चर्चा में रहा, उस पर कार्रवाई हमेशा ही अधूरी क्यों रही—और क्या कभी इस कथित नेटवर्क पर निर्णायक प्रहार होगा?

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